वर्ग चार्ट (विभागीय कुंडली): जीवन के 16 आयामों का सूक्ष्म विश्लेषण
वैदिक ज्योतिष में, वर्ग चार्ट (Varga Charts) या विभागीय कुंडलियाँ (Divisional Charts) किसी व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं का सूक्ष्म और गहन विश्लेषण करने के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरण हैं। जहाँ जन्म कुंडली (D-1) जीवन के सामान्य ढांचे और घटनाओं को दर्शाती है, वहीं वर्ग चार्ट हर भाव के फलों को छोटे-छोटे भागों में विभाजित करके, उस विशिष्ट क्षेत्र के परिणाम, शक्ति और भाग्य को विस्तार से बताते हैं।
वर्ग चार्ट की आवश्यकता और मूल सिद्धांत
एक राशि (30 अंश) में स्थित ग्रह जन्म कुंडली में एक ही फल देता हुआ प्रतीत हो सकता है, लेकिन वर्ग चार्ट उस 30 अंश को छोटे, समान या असमान भागों में विभाजित करते हैं।
उदाहरण के लिए: नवमांश (D-9) में, 30 अंश को 9 भागों में विभाजित किया जाता है (प्रत्येक भाग
$3^{\circ}20'$ का होता है)। जन्म कुंडली में एक ही राशि में स्थित दो ग्रहों के नवमांश अलग-अलग हो सकते हैं, जिससे उनके फल और शक्ति में बड़ा अंतर आता है।
वर्ग चार्ट्स का महत्व:
सूक्ष्म फलादेश: यह किसी भी ग्रह की शक्ति और उसके वास्तविक प्रभाव को समझने में मदद करता है।
विशिष्ट जीवन क्षेत्र: प्रत्येक वर्ग चार्ट जीवन के एक विशिष्ट क्षेत्र (जैसे विवाह, करियर, संतान, माता-पिता) को गहराई से उजागर करता है।
ग्रहों का बल (Shadbala): वर्ग चार्ट में ग्रह की स्थिति को देखकर उसके 'भावेश बल' (Positional Strength) का आकलन किया जाता है।
D-1 से वर्ग चार्ट (D-2 से D-30) बनाने की विधि का सार
वर्ग चार्ट का निर्माण ग्रह की डिग्री (अंश) को विभाजन संख्या (N) से गुणा करके किया जाता है। परिणामी डिग्री बताती है कि ग्रह D-N चार्ट में किस राशि में स्थित होगा। गणना की सटीकता और नियमों में क्षेत्रीय भिन्नताएँ हैं, लेकिन मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
वर्ग चार्ट | विभाजन (N) | प्रति भाग अंश (Interval) | निर्माण का मूल सिद्धांत (Construction Rule Summary) |
|---|---|---|---|
D-2 (होरा) | 2 | विषम राशि में: 15° तक सूर्य (सिंह), 15° के बाद चन्द्रमा (कर्क)। सम राशि में: विपरीत क्रम। | |
D-3 (द्रेष्काण) | 3 | प्रत्येक राशि का 1/3 भाग उसी राशि, 5वीं और 9वीं राशि को सौंपा जाता है। | |
D-4 (चतुर्थांश) | 4 | चर (Movable) राशि से 1, स्थिर (Fixed) राशि से 4, द्विस्वभाव (Dual) राशि से 7वें भाव से गिनती शुरू होती है। | |
D-5 (पंचमांश) | 5 | विषम राशि में, 1वें भाव से गिनती शुरू होती है। सम राशि में, 9वें भाव (त्रिकोण) से गिनती शुरू होती है। | |
D-7 (सप्तमांश) | 7 | विषम राशि में, गिनती राशि से ही शुरू होती है। सम राशि में, 7वें भाव (विपरीत राशि) से गिनती शुरू होती है। | |
D-9 (नवमांश) | 9 | चर राशि (मेष, कर्क, तुला, मकर) में मेष से गिनती शुरू होती है, स्थिर राशि में सिंह से, और द्विस्वभाव में धनु से। | |
D-10 (दशमांश) | 10 | विषम राशि में, गिनती राशि से ही शुरू होती है। सम राशि में, 9वें भाव से गिनती शुरू होती है। | |
D-12 (द्वादशांश) | 12 | ग्रह जिस राशि में है, गिनती उसी राशि से शुरू होती है। | |
D-30 (त्रिंशांश) | 30 | यह एक असमान विभाजन है (पुरुष/स्त्री राशियों में ग्रहों को अलग-अलग राशियों के प्रभुत्व के अनुसार रखा जाता है)। |
16 मुख्य वर्ग (षोडशवर्ग – Shodasavarga)
यहाँ 16 मुख्य वर्ग चार्ट्स की एक विस्तृत तालिका है:
क्र.सं. | वर्ग चार्ट (Varga Chart) | संस्कृत नाम | विभाजन (Division) | मुख्य रूप से दर्शाता है (Significance) |
|---|---|---|---|---|
1. | लग्न कुंडली (Natal Chart) | D-1 | 1 | शरीर, व्यक्तित्व, सामान्य जीवन, स्वास्थ्य (Foundation) |
2. | होरा (Hora) | D-2 | 2 | धन, वित्त, संपत्ति, परिवार से प्राप्त सुख-सुविधाएँ |
3. | द्रेष्काण (Drekkana) | D-3 | 3 | छोटे भाई-बहन, पराक्रम, साहस, यात्रा, मृत्यु का भय |
4. | चतुर्थांश (Chaturthamsha) | D-4 | 4 | भाग्य, संपत्ति (अचल), सुख-दुःख, माता-पिता से संबंध |
5. | पंचमांश | D-5 | 5 | प्रसिद्धि, रचनात्मकता, पूर्व जन्म के कर्म (Purva Punya), संतान की प्रतिभा |
6. | षष्ठांश | D-6 | 6 | रोग, स्वास्थ्य, कर्ज, बाधाएँ, शत्रु (स्वास्थ्य संबंधी) |
7. | सप्तमांश | D-7 | 7 | संतान, प्रजनन क्षमता, संतान का भविष्य, गोद लेना |
8. | अष्टमांश | D-8 | 8 | अनपेक्षित घटनाएँ, दुर्घटनाएँ, दीर्घकालिक बीमारी, विरासत |
9. | नवमांश | D-9 | 9 | विवाह, पति/पत्नी का स्वभाव, धर्म, सामान्य भाग्य, दशाओं का अंतिम फल |
10. | दशमांश | D-10 | 10 | करियर, व्यवसाय, पद, मान-सम्मान, कर्म का फल (Karma) |
11. | रुद्रांश | D-11 | 11 | मृत्यु, अनैतिक कार्य, विनाश, जीवन के बड़े कष्ट |
12. | द्वादशांश | D-12 | 12 | माता-पिता, विरासत, पूर्वजों का संबंध, वृद्धावस्था का जीवन |
13. | षोडशांश | D-16 | 16 | वाहन सुख, आराम, संपत्ति, जीवन के सामान्य सुख-सुविधाएँ |
14. | विंशांश | D-20 | 20 | पूजा-पाठ, उपासना, धार्मिक प्रवृत्ति, आध्यात्मिक विकास |
15. | चतुर्विंशांश (Siddhamsha) | D-24 | 24 | विद्या, शिक्षा, ज्ञान, बुद्धि, अकादमिक सफलता |
16. | त्रिंशांश | D-30 | 30 | दुर्भाग्य, दुष्टता (Evil Effects), संकट, स्त्री की कुंडली में विशेष रूप से महत्वपूर्ण |
चुने हुए महत्वपूर्ण वर्ग चार्ट्स का गहन विश्लेषण
आपके अनुरोध के अनुसार, यहाँ कुछ महत्वपूर्ण वर्ग चार्ट्स का विस्तृत फलादेश और उपयोग दिया गया है:
1. होरा (D-2) – धन और वित्त की कुंडली
उपयोग: यह विशेष रूप से किसी व्यक्ति की धन कमाने की क्षमता, वित्तीय स्थिरता और संपत्ति के संग्रह को दर्शाता है।
फलादेश: यदि D-2 में अधिकांश ग्रह सूर्य की होरा (सिंह) या चंद्रमा की होरा (कर्क) में उच्च या मित्र राशि में हों, तो जातक अत्यधिक धनवान होता है। सूर्य की होरा मेहनत और सार्वजनिक स्रोतों से धन देती है, जबकि चंद्रमा की होरा विरासत, आराम और पारिवारिक स्रोतों से धन देती है।
2. द्रेष्काण (D-3) – भाई-बहन और पराक्रम की कुंडली
उपयोग: छोटे भाई-बहन के साथ संबंध, व्यक्ति का आत्मविश्वास, और उसके जीवन की छोटी यात्राओं को देखने के लिए यह चार्ट महत्वपूर्ण है।
फलादेश: D-3 में तीसरे भाव का स्वामी और मंगल की स्थिति यह बताती है कि व्यक्ति अपने पराक्रम का उपयोग किस प्रकार करेगा। यह चार्ट व्यक्ति की बहादुरी और जोखिम लेने की क्षमता को भी दर्शाता है।
3. चतुर्थांश (D-4) – भाग्य और स्थायी सुख की कुंडली
उपयोग: जीवन में प्राप्त होने वाले स्थिर सुख, अचल संपत्ति (जमीन, घर), और सामान्य भाग्य का विश्लेषण D-4 से किया जाता है।
फलादेश: D-4 का लग्न और चतुर्थ भाव का स्वामी व्यक्ति के पैतृक सुख और भाग्य के उदय को दर्शाता है।
4. पंचमांश (D-5) – पूर्व पुण्य और रचनात्मकता की कुंडली
उपयोग: यह चार्ट व्यक्ति की रचनात्मक शक्ति, प्रसिद्धि, मंत्रों की सिद्धि और पूर्व जन्मों के कर्म (पूर्व पुण्य) के फलों को दर्शाता है।
फलादेश: D-5 में लग्नेश की मजबूत स्थिति जातक को किसी विशिष्ट क्षेत्र में सहज प्रतिभा (Innate Talent) देती है, जिसे वह जीवन में उपयोग करके प्रसिद्धि पाता है।
5. षष्ठांश (D-6) – स्वास्थ्य और ऋण की कुंडली
उपयोग: मुख्य रूप से रोग, प्रतिरोधक क्षमता, ऋण और शत्रुओं से आने वाली बाधाओं का गहन विश्लेषण D-6 से होता है।
फलादेश: D-6 में त्रिक भाव (6, 8, 12) में ग्रह की अशुभ स्थिति गंभीर या दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत देती है।
6. सप्तमांश (D-7) – संतान की कुंडली
उपयोग: संतान प्राप्ति की संभावना, प्रजनन क्षमता, और बच्चों का भविष्य एवं उनकी प्रतिभा D-7 से देखी जाती है।
फलादेश: D-7 का लग्न और पंचम भाव का स्वामी यह निर्धारित करता है कि व्यक्ति को संतान सुख कैसा मिलेगा और बच्चे किस क्षेत्र में सफल होंगे।
7. नवमांश (D-9) – भाग्य और धर्म की कुंडली (सबसे महत्वपूर्ण)
महत्व: D-1 के बाद सबसे महत्वपूर्ण चार्ट। इसे जीवन का दूसरा शरीर (Second Body) और विवाह की कुंडली भी कहते हैं।
फलादेश: D-9 में ग्रह का उच्च या मित्र राशि में होना उसकी वास्तविक शक्ति (Intrinsic Strength) और शुभता को बढ़ाता है। विवाह की गुणवत्ता, पति/पत्नी का स्वभाव, और जीवन का सामान्य भाग्य D-9 से देखा जाता है।
8. दशमांश (D-10) – कर्म (करियर) की कुंडली
उपयोग: यह चार्ट किसी व्यक्ति के पेशेवर जीवन, करियर में वृद्धि, पदोन्नति, कार्यस्थल का माहौल और सार्वजनिक जीवन में मान-सम्मान को पूरी तरह से दर्शाता है।
फलादेश: D-10 का लग्न या दशम भाव का स्वामी दशम भाव (D-1 का) में स्थित हो तो करियर में बड़ी सफलता मिलती है।
उच्च वर्ग (Higher Varga Charts: D-30 से D-60)
30 विभाजन से अधिक वाले चार्टों को उच्च वर्ग कहा जाता है। ये और भी सूक्ष्म और अमूर्त विषयों पर प्रकाश डालते हैं।
वर्ग चार्ट | विभाजन (N) | मुख्य रूप से दर्शाता है (Significance) | गहन विवरण |
|---|---|---|---|
D-30 (त्रिंशांश) | 30 | दुर्भाग्य, दुष्टता (Evil Effects), संकट | यह जीवन में आने वाली अचानक समस्याओं, दुःखों और विशेष रूप से महिलाओं के चरित्र या स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले नकारात्मक प्रभावों को दर्शाता है। |
D-40 (खवेदांश) | 40 | शुभ-अशुभ परिणाम (Fortunate/Unfortunate Events) | इसे 'पुत्र-पौत्र' या 'शुभ-अशुभ' वर्ग भी कहते हैं। यह जीवन में आने वाले सौभाग्य और दुर्भाग्य की मात्रा को दर्शाता है। |
D-45 (अक्षवेदांश) | 45 | चरित्र, पितृत्व, पैतृक परंपराएँ | यह चार्ट व्यक्ति के चरित्र की नींव, पैतृक संबंध, पूर्वजों के कर्मों का प्रभाव और उसके व्यक्तित्व के गहरे पहलुओं को दर्शाता है। |
D-60 (षष्ट्यंश) | 60 | गहन कर्म (Deepest Karma), सूक्ष्म फल | D-60 को सबसे सूक्ष्म और महत्वपूर्ण वर्ग माना जाता है, क्योंकि यह ग्रह की स्थिति को |
निष्कर्ष: वर्ग चार्ट जन्म कुंडली के फलादेश में निश्चितता और गहराई लाते हैं। किसी भी घटना का अंतिम और सटीक फलादेश देने के लिए, ज्योतिषी को दशाओं के साथ-साथ संबंधित वर्ग चार्ट में भी ग्रहों की स्थिति और बल का विश्लेषण करना अनिवार्य है।
आगे के सुझाव: क्या आप D-9 (नवमांश) या D-10 (दशमांश) में किसी विशिष्ट ग्रह (जैसे शनि या बृहस्पति) की स्थिति के फल पर विस्तृत नियम जानना चाहेंगे?
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